उम्मीद मेरी मरती नहीं ! एक कविता

क्या करूँ ए माझी, उम्मीद मेरी मरती नहीं ,

मैं चाहे कितनी बार भी गिर जाऊं, या ठोकरे खाऊं,

वह किसी से डरती नहीं। 

लाखों बार हुआ है, सपने टूट जाते हैं ,

हज़ारों बार वह भंवर में डूब जाते हैं ,

फिर भी आहें मेरी वीरानों से गुज़रती नहीं। 

क्या करूँ ए माझी, उम्मीद मेरी मरती नहीं। 

चलती हूँ यहाँ अपना हौंसला लिए,

मन फिर से जला लेता है आशाओं के लाखों दिये,

कैसे कैसे लोग मुझसे आगे निकल जाते हैं ,

अक्सर बिना सर पैर के इरादों को हम सबसे आगे खड़ा पाते हैं ,

पर ये बात जाने क्यों मुझे कभी अखरती नहीं ,

क्या करूँ ए माझी, उम्मीद मेरी मरती नहीं। 

ऐसा भी नहीं है की बुलंदियों के ख्वाब नहीं हैं ,

ऐसा भी नहीं है की कोई सीने में खौलता हुआ सैलाब नहीं हैं ,

फिर भी पैमाने की प्यास छलकती नहीं,

क्या करूँ ए माझी उम्मीद मेरी मरती नहीं। 

                                                          शैलजा सिंह

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s