बहुत दिनों से नींद से मुलाक़ात नहीं हुई थी ,
सोचा मिल ही आते हैं,
काफी दिनों से नाराज़ थी…
की घर आकर भी नहीं आते हैं .
की और बातों से बात करते हैं.
मुझसे नहीं करते गुफ्तगू ..
तो आज इत्मीनान से उसके घर बैठ कर
पूरी करदी उसकी यह भी आरज़ू
बहुत दिनों से नींद से मुलाक़ात नहीं हुई थी ,
सोचा मिल ही आते हैं,
काफी दिनों से नाराज़ थी…
की घर आकर भी नहीं आते हैं .
की और बातों से बात करते हैं.
मुझसे नहीं करते गुफ्तगू ..
तो आज इत्मीनान से उसके घर बैठ कर
पूरी करदी उसकी यह भी आरज़ू
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