जब क़यामत का दिन आएगा

Hindi poetry by Shailaza Singh.

जब क़यामत का दिन आएगा,
वह तुमसे ये नहीं पूछेगा की पाया या नहीं
वह पूछेगा तुमसे की कोशिश कितनी की ?
वह पूछेगा तुमसे की वह जो अरमान जगाया था मैंने तेरे सीने में ,
वह जो तम्मनाओं के बीज डाले थे,
उनको तुमने खाद और पानी डाला की नहीं ?
वह तुमसे ये नहीं पूछेगा की तुमने कितनी दौलत कमाई ,
पर ये ज़रूर पूछेगा की तुम्हारी वजह से किसके चेहरे पे मुस्कान आयी या नहीं।
वह नहीं पूछेगा मौसम का हाल,
पर पूछेगा की तुमने उस गरीब को क्यों नहीं लगाया अपने हाथ से गुलाल।
वह नहीं पूछेगा की तुमने अपनी सुंदरता से कितनो को रिझाया ,
पर पूछेगा की क्या उस गरीब जानवर पर तुम्हे तरस आया ?
तुम्हारे घर की ऊंचाई से उसको नहीं कोई सरोकार ,
पर तुम्हारी हिम्मत और लगन से है उसको प्यार।
उसकी नज़र में पैसे तुम्हारे मिटटी बन जायेंगे,
पर तुम्हारे औरों के लिए जज़्बात उसको तुम्हारे दिल की गहरायी बताएंगे।
कितनी अजीब बात हैं न
की क़यामत का दिन जब आयेगा तो हर वो चीज़ जिसके पीछे भाग रहे हो,
बेमानी हो जाएगी ,
क्योंकि तुम्हारी खुदी खुद ही उस खुदा को दिख जाएगी।
शैलजा सिंह

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