Life is a great teacher…it keeps testing whether you still remember your lesson. Here is a small verse. Please listen, like and follow this channel for more. #lifelessons #mistakesarelessons #dontrepeatmistakes #Dontfollowanyone #discoveryourowncalling #loveyouzindagi #hindipoetry #livelifetothefullest #acceptyourself #temptation
Category: hindi poetry
-
कहाँ से चले , कहाँ आये हम?
इन सालों में कितनों को अलविदा कह दिया बिन चाहे,
कितने पथिको की खो गयी राहें ,
कितनों की आँखें नम हैं , सुनसान सी ,
जैसे रह न गयी हो उनमें कोई जान सी.
कितने ढाहे हैं एक अनदेखे अनजाने ने ऐसे सितम ,
कहाँ से चले और कहाँ आगये हम।बचपन में खूब फिल्मों में दिखाया ,
की हर मुसीबत में एक ऊपरी शक्ति ने ही बचाया ,
पर इतना उस भगवान् और हर अल्लाह को पुकारने पर भी,
वह आज तक नहीं आया।
बड़ा लम्बा लग रहा है ये पतझड़ का मौसम ,
ये कहाँ से चले कहाँ आ गए हम।सत्ता और साज़िशों की रंजिशों के बीच ,
अधर झूल में है आम इंसान,
भगवन सोने चला गया, दुनिया पे छा रहा है शैतान,
हालातों के मारे, बेबस, खौफ भरी निगाहें मूक बयां करें अपना गम ,
ये कहाँ से चले और कहाँ आगये हम।जिसको बीमारी न मार सकी, उसे भूख और बेरोज़गारी के भेड़ियों ने मार गिराया ,
न जाने इस देश में कैसा मंज़र आया ,
सब के मुँह पे ताले हैं ,
ये कैसा सन्नाटा है भाई ?
इतने उभरते देश को,
किसने नज़र लगाई ?
कोई अब इस नईया को उभार सके ,
क्या किसीमे नहीं इतना दम?
ये कहाँ से चले ,
कहाँ आये हम?
शैलजा सिंहA poem on corona -
ए खुदा

ए खुदा,
कभी कभी ऐसा लगता है,
की हर किस्म का नमूना तूने मेरे हिस्से लिख डाला है ,
तेरी नज़र में माना तेरा ये मज़ाक आला है,
पर मेरे दिल की भी तो सोच एक बार,
जिसने इतना किया नमूनों की नामुनियत का दीदार ,
की बस यही दुआ करता है बारबार ,
की अब तो उसकी भी मुलाक़ात हो किसी सच्चे दीवाने से..
की वह भी कोई तो अफसाना बयां कर सके ज़माने में.
रंजो गम के रंगों से उसने खूब होली मनाई है…
अब तो उसको हर कोई दिखता हरजाई है ,
तो कर इतना करम मेरे परवर्दिगार
की दिखा दे उसे की प्यार दुनिया में है आज भी बरकरार
रुखसत जहाँ से लेने से पहले, इल्म हो जाए की तू यहाँ भी मौजूद है…
की जन्नत जिसे कहते हैं उसका का दुनिया में आज भी वजूद है..…shailaza singh
-
वक़्त पर छोड़ दो
क्यों सोचना इतना की दिमाग ख़राब हो जाये,
क्यों ढूंढना इतना की हम खुद ही खो जाएं .
कश्ती को भॅवर में जाने से पहले मोड़ दो,
कुछ बातें वक़्त पर छोड़ दो.
आने वाले पल की पंखुड़ी,
धीरे धीरे आँख खोलेगी .
जो होना है .
तुमको इशारों में बोलेगी,
इतने बेचैन मत बनो की मिटटी के पकने से पहले,
तुम कच्चे घड़े को फोड़ दो.
कुछ बातें वक़्त पर छोड़ दो.
जिनको मिलना होता है,
उनको रोक नहीं पता ज़माना,
और जहाँ मिलन नहीं,
वहां बनता नहीं फ़साना
तुम अभी कसके पकड़ो अरमानो की डोर को
कुछ बातें वक़्त पर छोड़ दो.
उसको भी उड़ने दो, तुम भी भरो उड़ान ,
दोनों की हो अपनी पहचान ..
साथ चलो एक नयी चेतना जगाओ ,
वह तुम्हारी बने , तुम उसकी प्रेरणा बन जाओ
पंख फैलाओ और मत मानो गगन के छोर को .
कुछ बातें वक़्त पर छोड़ दो
– शैलजा
-
Everyone needs followers…हर किसी को भक्त चाहिए
Every one needs followers! A poem by Shailaza Singh #hindipoetry
#hindipoems
-
जब क़यामत का दिन आएगा

जब क़यामत का दिन आएगा,
वह तुमसे ये नहीं पूछेगा की पाया या नहीं
वह पूछेगा तुमसे की कोशिश कितनी की ?
वह पूछेगा तुमसे की वह जो अरमान जगाया था मैंने तेरे सीने में ,
वह जो तम्मनाओं के बीज डाले थे,
उनको तुमने खाद और पानी डाला की नहीं ?
वह तुमसे ये नहीं पूछेगा की तुमने कितनी दौलत कमाई ,
पर ये ज़रूर पूछेगा की तुम्हारी वजह से किसके चेहरे पे मुस्कान आयी या नहीं।
वह नहीं पूछेगा मौसम का हाल,
पर पूछेगा की तुमने उस गरीब को क्यों नहीं लगाया अपने हाथ से गुलाल।
वह नहीं पूछेगा की तुमने अपनी सुंदरता से कितनो को रिझाया ,
पर पूछेगा की क्या उस गरीब जानवर पर तुम्हे तरस आया ?
तुम्हारे घर की ऊंचाई से उसको नहीं कोई सरोकार ,
पर तुम्हारी हिम्मत और लगन से है उसको प्यार।
उसकी नज़र में पैसे तुम्हारे मिटटी बन जायेंगे,
पर तुम्हारे औरों के लिए जज़्बात उसको तुम्हारे दिल की गहरायी बताएंगे।
कितनी अजीब बात हैं न
की क़यामत का दिन जब आयेगा तो हर वो चीज़ जिसके पीछे भाग रहे हो,
बेमानी हो जाएगी ,
क्योंकि तुम्हारी खुदी खुद ही उस खुदा को दिख जाएगी।
शैलजा सिंह -

उम्मीद मेरी मरती नहीं ! एक कविता

क्या करूँ ए माझी, उम्मीद मेरी मरती नहीं ,
मैं चाहे कितनी बार भी गिर जाऊं, या ठोकरे खाऊं,
वह किसी से डरती नहीं।
लाखों बार हुआ है, सपने टूट जाते हैं ,
हज़ारों बार वह भंवर में डूब जाते हैं ,
फिर भी आहें मेरी वीरानों से गुज़रती नहीं।
क्या करूँ ए माझी, उम्मीद मेरी मरती नहीं।
चलती हूँ यहाँ अपना हौंसला लिए,
मन फिर से जला लेता है आशाओं के लाखों दिये,
कैसे कैसे लोग मुझसे आगे निकल जाते हैं ,
अक्सर बिना सर पैर के इरादों को हम सबसे आगे खड़ा पाते हैं ,
पर ये बात जाने क्यों मुझे कभी अखरती नहीं ,
क्या करूँ ए माझी, उम्मीद मेरी मरती नहीं।
ऐसा भी नहीं है की बुलंदियों के ख्वाब नहीं हैं ,
ऐसा भी नहीं है की कोई सीने में खौलता हुआ सैलाब नहीं हैं ,
फिर भी पैमाने की प्यास छलकती नहीं,
क्या करूँ ए माझी उम्मीद मेरी मरती नहीं।
शैलजा सिंह
You must be logged in to post a comment.