ए खुदा

ए खुदा,
कभी कभी ऐसा लगता है,
की हर किस्म का नमूना तूने मेरे हिस्से लिख डाला है ,
तेरी नज़र में माना तेरा ये मज़ाक आला है,
पर मेरे दिल की भी तो सोच एक बार,
जिसने इतना किया नमूनों की नामुनियत का दीदार ,
की बस यही दुआ करता है बारबार ,
की अब तो उसकी भी मुलाक़ात हो किसी सच्चे दीवाने से..
की वह भी कोई तो अफसाना बयां कर सके ज़माने में.
रंजो गम के रंगों से उसने खूब होली मनाई है…
अब तो उसको हर कोई दिखता हरजाई है ,
तो कर इतना करम मेरे परवर्दिगार
की दिखा दे उसे की प्यार दुनिया में है आज भी बरकरार
रुखसत जहाँ से लेने से पहले, इल्म हो जाए की तू यहाँ भी मौजूद है…
की जन्नत जिसे कहते हैं उसका का दुनिया में आज भी वजूद है..

…shailaza singh

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