
चाह नहीं किसी धनवान की पत्नी कहलाऊँ
चाह नहीं किसी राजा के घर पर राज कर
भाग्य पर इठलाऊँ
चाह नहीं किसी की प्रेमिका बन
उसके मिलन गीत गाऊँ
चाह नहीं दहेज़ ले जा कर माँ बाप पर यूँ बोझ कहाऊँ
मुझे पढ़ा लिखा कर मेरे बनमाली
उस पथ पर चलते हुए देख
आत्मनिर्भर बनने के लिए
जिस पथ जाए नारी हर एक
– शैलजा सिंह
(माखन लाल चतुर्वेदी जी की पुष्प की अभिलाषा से प्रेरित)
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