पुनर जन्म सा कुछ पाते हैं ,
जब माँ बाप बन जाते हैं
काम उपदेशों से नहीं चलता है
सैलाब सख्ती से नहीं थमता है
कुछ नहीं बदलता
जब तक हम नहीं बदल जाते हैं
पुनर जन्म सा कुछ पाते हैं ,
जब माँ बाप बन जाते हैं
कुछ नया हो जब उनसे कराना
चलता नहीं कोई पैंतरा पुराना
जब तक खुद नहीं कर दिखाते हैं
उनको कहे शब्द नहीं समझ आते हैं
पुनर जन्म सा कुछ पाते हैं ,
जब माँ बाप बन जाते हैं
बीते लड़कपन की हरकतें अब उनके आईना में जब नज़र आती हैं
खुद में खामियां भी नज़र आती हैं
मिसाल कायम करने के लिए
खुद सुधर जाते हैं
पुनर जन्म सा कुछ पाते हैं ,
जब माँ बाप बन जाते हैं
हमारे हर कदम, हर सांस पर उनकी नज़र बरक़रार है
ये कुर्बानी तो नहीं पर एक अनूठा प्यार है
हीरे को तराशते हुए खुद कुंदन बन जाते हैं
पुनर जन्म सा कुछ पाते हैं ,
जब माँ बाप बन जाते हैं.
– शैलजा सिंह

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